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US Open: मैच के बाद कोर्ट पर भिडीं टाउनसेंड और ओस्टापेंको, नस्लभेदी का लगा आरोप_我的网站

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一 |      न्यूयार्क, एपी। पहले राउंड में हार के बाद दानिल मेदवेदेव के कोर्ट पर खराब व्यवहार के बाद अब बुधवार रात महिला सिंगल्स के दूसरे दौर में अमेरिका की टेलर टाउनसेंड और लातविया की जेलेना ओस्टापेंको के बीच कोर्ट पर तीखी नोकझोंक देखने को मिली। टाउनसेंड ने यह मैच 7-5, 6-1 से जीतकर तीसरे दौर में जगह बनाई।,मैच खत्म होते ही दोनों खिलाड़ियों ने नेट पर हाथ मिलाया, लेकिन इसके बाद दोनों वहां से जाने की बजाए कोर्ट के किनारे बहस में उलझ गईं। पूर्व फ्रेंच ओपन चैंपियन ओस्टापेंको ने टाउनसेंड पर अंगुली हिलाते हुए कहा कि उनके पास 'क्लास और शिक्षा नहीं है।',जब टाउनसेंड से एक पत्रकार ने पूछा कि क्या उन्हें ये टिप्पणी नस्लीय लगी तो टाउनसेंड ने कहा, मैंने इसे उस तरह से नहीं लिया। लेकिन यह सच है कि हमारे समुदाय को लेकर अक्सर 'अनपढ़' जैसी बातें कही जाती हैं, जबकि यह बिल्कुल गलत है। चाहे इसमें नस्लीय भाव रहा हो या नहीं, यह वही बता सकती हैं। मेरा ध्यान सिर्फ टूर्नामेंट में आगे बढ़ने पर है। इसके बाद ओस्टापेंको ने इंटरनेट मीडिया पर सफाई देते हुए लिखा, मुझे ढेरों संदेश मिले कि मैं नस्लभेदी हूं। लेकिन मैं कभी भी नस्लभेदी नहीं रही। मैं सभी को समान रूप से सम्मान देती हूं।,ओस्टापेंको ने टाउनसेंड पर 'अनुशासनहीन' होने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि जब टाउनसेंड को नेट कार्ड से अंक मिला तो उन्होंने 'सॉरी' नहीं कहा। इसके अलावा यह भी आपत्ति जताई कि टाउनसेंड ने मैच से पहले वार्मअप नेट के पास से शुरू किया, जबकि ज्यादातर खिलाड़ी बेसलाइन से शुरू करते हैं। इस पर टाउनसेंड का कहना था कि वह लंबे समय से वाली से वार्म-अप शुरू करती रही हैं। यह पहली बार नहीं है जब ओस्टापेंको विवाद में रही हों।,2021 विंबलडन में अला टोमलजानोविच के खिलाफ हार के बाद भी उनके रवैये को लेकर विवाद हुआ था। दूसरी ओर टाउनसेंड हाल ही में डबल्स रैंकिंग में नंबर वन बनी हैं। सिंगल्स में वह फिलहाल 139वें स्थान पर हैं और 2019 के बाद पहली बार किसी ग्रैंड स्लैम में पूर्व चैंपियन को हराने वाली सबसे निचली रैंक वाली अमेरिकी खिलाड़ी बन गईं।,यह भी पढ़ें- US Open: कार्लोस अलकराज के आगे नहीं टिक पाए मात्तिया बेलुची, एकतरफा रहा मुकाबला यह भी पढ़ें- US Open 2025: सिर मुंडवा कर कोर्ट पर पहुंचे अलकराज ने खेल से जीता दिल, फैंस ने नए लुक पर जमकर बजाई तालियां。    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका में रहने वाले लाखों विदेशी कर्मचारियों और छात्रों के लिए ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीजा और ग्रीन कार्ड प्रोग्राम में भारी बदलाव की ओर इशारा किया है। यह बदलाव भारतीय कर्मचारियों और छात्रों को खास तौर पर प्रभावित करेगा। H-1B वीजा का 70% हिस्सा भारतीय छात्र हैं।,अमेरिकी वित्त मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने H-1B वीजा को धोखा बताया है और कहा कि अब अमेरिकी नौकरियों को अमेरिकी नागरिकों के लिए प्राथमिकता दी जाएगी। लुटनिक ने फॉक्स न्यूज से बात करते हुए कहा, "H-1B प्रोग्राम को बदलना जरूरी है। औसत अमेरिकी सालाना 75,000 डॉलर कमाता है, जबकि ग्रीन कार्ड धारक 66,000 डॉलर। हम निचले स्तर के लोगों को क्यों चुन रहे हैं? अब ट्रंप प्रशासन 'गोल्ड कार्ड' लाएगा, जिससे सबसे काबिल लोग देश में आएंगे।",ट्रंप प्रशासन H-1B वीजा की मौजूदा लॉटरी प्रणाली को खत्म करने की योजना बना रहा है। इसके बजाय, वीजा उन लोगों को मिलेगा जो ज़्यादा वेतन वाली नौकरियों में काम करते हैं। इसका मतलब है कि कम वेतन वाली नौकरियों में काम करने वाले विदेशी कर्मचारी, जैसे नए स्नातक या छोटे व्यवसायों में काम करने वाले मुश्किल में पड़ सकते हैं। यह बदलाव पहले भी 2021 में प्रस्तावित था, लेकिन बाइडन प्रशासन ने इसे लागू नहीं किया।,इसके अलावा, ग्रीन कार्ड प्रक्रिया में भी बदलाव होंगे। ट्रंप का 'गोल्ड कार्ड' प्रोग्राम एक नया विकल्प हो सकता है, जो मेधावी और उच्च वेतन वाले कर्मचारियों को प्राथमिकता देगा। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि ग्रीन कार्ड किसी को अमेरिका में हमेशा रहने का हक नहीं देता, जिससे ग्रीन कार्ड धारकों के भविष्य पर सवाल उठ रहे हैं।,भारतीय कर्मचारी और छात्र, जो H-1B वीजा पर निर्भर हैं, इस बदलाव से सबसे ज़्यादा प्रभावित होंगे। आंकड़ों के मुताबिक, हर साल H-1B वीजा में 70% से ज्यादा भारतीयों को मिलता है। नए नियमों के तहत, वीजा के लिए बायोमेट्रिक जानकारी और घर का पता जैसी निजी जानकारी देना अनिवार्य होगा। साथ ही, सख्त जांच और बढ़ी हुई दस्तावेजीकरण की मांग से प्रक्रिया और जटिल हो जाएगी। इस साल जनवरी में ट्रंप के सत्ता में आने के बाद से विदेशी कर्मचारियों और छात्रों के लिए नियम सख्त हो गए हैं। सिटिज़नशिप और इमिग्रेशन सर्विसेज़ (CIS) का ऑफिस, जो आप्रवासियों की मदद करता था, बंद कर दिया गया है। इससे वीजा प्रक्रिया में तकनीकी मदद लेना मुश्किल हो गया है।,यह भी पढ़ें: इंडोनेशिया में दो पुरुषों को सरेआम मारे गए 80 कोड़े, दोनों पर एक दूसरे से गले मिलने और चुंबन का लगा आरोप

二 |

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